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Saturday, July 21, 2012

ये नमी

भीगी हुई  ये जमीं,

बहती हुई ये सर्द हवाएं .....

कह रही हैं कि बरसे हैं बदरा अभी अभी,

कि रोया है ये आसमां   अभी अभी...
.
उमड़ घुमड़ कर अठखेलियाँ करते बादलों को खोकर,

नम हैं ये हवाएं, नम है ये मौसम.....

नम है ये ऑंखें भी आज,

अधूरेपन का एहसास दिल में लिए,


मनभावन फुहारों  के बीच तेरी यदों को लिए.......

नमी आँखों की हो या मौसम की,

राज़-ए-दर्द बयां कर देती है ...


Saturday, July 14, 2012

ख़ामोशी

 ख़ामोशी...

बेजुबां   होकर भी कितना  कुछ  कह जाती है... 

अनेकों रंग  हैं इसके भी ,

कभी नाराजगी  जता  जाती है ये,

तो कभी दिल में  मच  रही  हलचल  का  द्योतक है ..

कभी दिल के चैन का  जरुरत ये बनती है ,

तो कभी  बेचैनी और और  बेताबी  का  सबब ये है .

तूफान के आने से पहले भी ये है ,

तूफां के चले जाने के बाद भी ये ही है .

ध्यान में  भी ये है ,

तो शमशान में भी ये ही है .

यूँ  तो है ये ,

एकदम शांत, शुन्य और  मौन .

पर खास-ए -ख़ामोशी तो देखिये,

ये  सन्नाटा और मौन ही काफी है,

राज़-ए-ख़ामोशी बयां  करने को.


ये  ख़ामोशी ......

Monday, July 9, 2012

ठोकर

समझने - समझाने से  जो कुछ  होता  ग़र ,                                                 

                                        तो इन्सान  गलतियाँ ही न करता.....

ये तो ठोकरें हैं  पग - पग  पर ,                                                 

                                           जो चलना  सिखातीं  हैं......




Friday, July 6, 2012

ढूंढता हूँ खुद में खुद को....

ढूंढता हूँ खुद  में  खुद को,

खोया सा हूँ न जाने कहाँ ...

खुद ही उत्सुक नयी आकाँक्षाओं को लिए ,

खुद ही बेबस  अपनी अकर्मण्यता  से ..........

रेत के खुबसूरत महल की भांति,

मगर पवन वेग न सह पाए ...........

बांस सा सशक्त मगर खोखला ...

अंधेरो में आँखें  मूदकर  चलता हुआ सा ,

उमीदों के भंवर में डूबता हुआ  सा ...

अम्बर से अनंत में,

शून्य से मौन में ..

समुद्र की भांति गहन ,

काली  घनघोर घटाओ  सा  अंधकारमय ..

जैसे  पानी से लिखी किताब के  पन्नो को पढता हुआ ...

ढूंढता हूँ खुद  में  खुद को....

Thursday, July 5, 2012

ख्वाब...एक अजीब कशमकश

एक अजीब  कशमकश है ये ख्वाब भी....

एक उम्मीद की किरण से,

आने वाले  पल को कल्पित करते..

 आगाज और  अंजाम  के बीच जद्दोजहद करते हुए..

रोशनी की अभिलाषा  लिये ,

अंधेरो के  डर के साँथ..

टूटे ग़र ये  तो तोड़ के  रख दें....

हकीकत की दुनिया में पल बढ़कर,

एक  काल्पनिक दुनिया में रखते  हैं....

उन्मादित, प्रफ्फुलित, आनंदमय और आशान्वित करते हुए,

आंखिर में हकीकत का एहसास भी करा जाते हैं .....
.
ये ख्वाब.....