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Thursday, July 5, 2012

ख्वाब...एक अजीब कशमकश

एक अजीब  कशमकश है ये ख्वाब भी....

एक उम्मीद की किरण से,

आने वाले  पल को कल्पित करते..

 आगाज और  अंजाम  के बीच जद्दोजहद करते हुए..

रोशनी की अभिलाषा  लिये ,

अंधेरो के  डर के साँथ..

टूटे ग़र ये  तो तोड़ के  रख दें....

हकीकत की दुनिया में पल बढ़कर,

एक  काल्पनिक दुनिया में रखते  हैं....

उन्मादित, प्रफ्फुलित, आनंदमय और आशान्वित करते हुए,

आंखिर में हकीकत का एहसास भी करा जाते हैं .....
.
ये ख्वाब.....

2 comments:

  1. सारे फसाद की जड़ यह ख्वाब ही तो होते हैं :)गर यह न हों तो जीना भी मुश्किल है। और यदि हों तो इन्हें पूरा करना भी बहुत मुश्किल होता है क्यूंकि यह उन्मादित, प्रफ्फुलित, आनंदमय और आशान्वित करते हुए,आंखिर में हकीकत का एहसास भी करा जाते हैं .....सुंदर रचना
    .समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

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  2. dhanywad pallavi g ....apki post m milte hn

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