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Saturday, July 21, 2012

ये नमी

भीगी हुई  ये जमीं,

बहती हुई ये सर्द हवाएं .....

कह रही हैं कि बरसे हैं बदरा अभी अभी,

कि रोया है ये आसमां   अभी अभी...
.
उमड़ घुमड़ कर अठखेलियाँ करते बादलों को खोकर,

नम हैं ये हवाएं, नम है ये मौसम.....

नम है ये ऑंखें भी आज,

अधूरेपन का एहसास दिल में लिए,


मनभावन फुहारों  के बीच तेरी यदों को लिए.......

नमी आँखों की हो या मौसम की,

राज़-ए-दर्द बयां कर देती है ...


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