There was an error in this gadget

Monday, August 20, 2012

बांवरा मन....

बांवरा मन उड़ चला है,
बेलगाम, हवा से करे बातें....
उठता कभी, गिरता कभी,
देखे न दिन और रातें ...
वक्त और बेवक्त,
क्या सही और क्या गलत,
कुछ भी न तो ये जाने..
हकीकत के मोतियों को,
ख्वाब में पिरोते हुए,
अपनी ही बस ये माने...
देखता है एक कोने में,
चुप चाप बैठा ये ह्रदय ..
धडकनों को लयबद्ध करता,
सुरीला और तन्मय...
पहले तोले फिर ये बोले,
ए बाँवरे तू क्यों उड़ रहा,
कुछ तो शर्म लाज कर..
जरा सोच के अपने पग तू धर ..
मेरी धडकनों की साज पर..
मेरी धडकनों की साज पर....

4 comments:

  1. बहुत अच्छी भावाव्यक्ति , बधाई

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत धन्यवाद सुनील जी

    ReplyDelete
  3. बहुत खूबसूरत......

    अनु

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद अनु जी

      Delete