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Friday, September 14, 2012

muhabbat hai tumse...................

                       मुहब्बत  हो तो एसी  हो ....

                      कि  कहना न पढ़ जाये मुहब्बत है तुमसे ................

 
 
 

Sunday, September 2, 2012

लग जाओ गले................

बेचैनी इधर भी है,

तो बेताब वो भी हैं।

नाराज़ हम भी हैं तो,

खफ़ा  वो भी हैं।

रहा  हमसे भी नहीं जाता उनके बिन तो,

तड़पन उधर भी है तन्हापन  की ।

चाहत है कि,

पिघला दो बर्फ नाराजगी की,

प्यार की गर्मी से।

खींच दो डोर को कि,

खुल जाये ये गांठ अहम की।

छा  जाने दो प्यार की रौशनी को,

कि हट जाये ये धुंध सी अब।

खिल उठने दो फिज़ाओ  को,

कि महक उठे ये समां  भी अब ।

तोड़ तो कशमकश के इस बांध को,

कि छलक  उठे प्यार ही प्यार अब।

लग जाओ गले मेरी बाँहों में  आके,

कि  ठहर सी गयी है ये जमी,

ठहर सा गया है ये आसमाँ  अब तक ।