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Wednesday, January 16, 2013

kuch bheega bheega sa tha mausam (कुछ भीगा भीगा सा था मौसम)

कुछ भीगा भीगा सा था मौसम,

कुछ सर्द हवाएं भी थी नम।।

लहराई शाखें  पेड़ों की संग हवा के,

रफ़्तार से करने लगी बातें हवाएं।।

पत्तों पे अटकी बूदों को छिटकते हुए,

निकली सर्द हवाएं गालों  को छुते हुए।।

 बूदें कुछ इस तरह पड़ी गालों  पे,

इक सिरहन सी पैदा कर गयी बदन में।।

थम गये थे मेघ दिन भर बरस कर,

थक गए थे मेघ दिन भर बरस कर।।

था क्षितिज में सूर्य भी,

साँझ का स्वागत करता हुआ।।

झांक रही थी कुछ किरणें,

बादलों  में बने इक सुराख़ से,

आकाश को संतरी करते हुए।।

 न जाने किस तरह का था य योग,

था मिलन या फिर था वियोग।।

हर रस भरा था,

कुछ अधुरा कुछ भरा था।।

हलकी  ख़ुशी थी हल्का था गम,

कुछ भीगा भीगा था मौसम,

कुछ सर्द भावाएं भी थी नम।।।










8 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति | शुभकामनायें हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

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  2. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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  3. dhanywad rajneesh ji,,,,ji jarrur,,

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