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Monday, February 25, 2013

इंतजार

आज  गलियों  में फिर  पानी भरा है ,

आज फिर से आसमां रोया बहुत  है।।

 बड़ी लम्बी होतीं हैं मुहब्बत में रातें,

कि हमने भी रातों में तकियों को भिगोया बहुत है।।

उसकी मुहब्बत, उसकी बेरुखी से ज्यादा दर्द दे गयी,

कि  वो मेरे क़रीब भी रहा बहुत  है।।

तक़लीफ़ देने लगतीं हैं धड्कनें  भी जब टूटते हैं ख्वाब,

कि  हमने भी ख्वाबों को संजोया बहुत है।।

अब तो हरपल  मुस्कुराते हैं हम भी,

कि  हमने भी अब तक खोया बहुत है।।

इंतजार है मौत का कि आके बचा ले जिंदगी की इन उलझनों से,

कि अब हमने भी जिंदगी को जी लिया बहुत है।।।।।।।