There was an error in this gadget

Monday, December 23, 2013

पूछता हूँ दिल से

अब भी पूछता हूँ  दिल से,
कब थमेगा ये सिलसिला।

यूँ  कब तलक तड़पायेगा,

सोचता है ये,

चाहता है ये,

चाहतो के फेर में गिरता संभलता,

टूटता है ये। 

गिरता है पड़ता है  पर थमता नहीं।

मचलता है तड़पता है पर थमता नहीं। 

कमजोर करता है मुझे तोड़ के रख देता है.. 

पर थमता नहीं।।

आंखिर कब तलक यूँ ही धड़कता रहेगा 

अब भी पूछता हूँ  दिल से,

कब थमेगा ये सिलसिला।

No comments:

Post a Comment